शिक्षा किसी समाज की आधारभूत संरचना होती है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मुहैया कराई जाए। लेकिन क्या आपने कभी विचार किया है कि बिजली के बिना एक स्कूल में सीखना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है? बिहार के ग्रामीण हिस्सों में कई प्राथमिक विद्यालयों में बिजली की कमी एक गंभीर मुद्दा रहा है। इस कमी के कारण बच्चों को सही रोशनी, पंखे और अन्य आवश्यक चीजों के अभाव में पढ़ाई करनी पड़ती है, जो उनकी शिक्षा के स्तर पर नकारात्मक असर डालता है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए, बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हाल ही में, पटना में शिक्षा विभाग ने एक दस्तावेज जारी किया है जिसमें बताया गया है कि 2025-2026 शैक्षणिक वर्ष के लिए राज्य के सभी प्राथमिक विद्यालयों में मुफ्त ट्यूब लाइट, बल्ब और बिजली (वायरिंग सहित) उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल का मकसद यह है कि हर विद्यालयों में बिजली की सुविधा हो, ताकि बच्चों को एक बेहतर अध्ययन वातावरण मिल सके। यह कदम शैक्षणिक माहौल को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, साथ ही इससे विद्यार्थियों के सीखने का माहौल भी बहुत बेहतर होगा।
आदेश का संक्षिप्त विवरण
7 मई 2025 को निदेशक, प्राथमिक शिक्षा (बिहार) द्वारा जारी पत्र में सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ सभी प्राथमिक विद्यालयों में निम्नलिखित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं:
- साफ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था
- ट्यूब लाइट या बल्ब की सुविधा
- बिजली की उपलब्धता (वायरींग के साथ)
इसके लिए प्रत्येक प्राथमिक विद्यालयों को एक लाख रुपए तक की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जो समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत “Composite Grant” (स्कूल विकास अनुदान) के रूप में दी जा रही है।
इस आदेश की पृष्ठभूमि
बिहार में कई प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहाँ अभी भी पेयजल, बिजली या ट्यूब लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। इसका बच्चों के अध्ययन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यह निर्णय लिया है।
इसमें पहले से स्वीकृत एक लाख रुपए की राशि को इन सुविधाओं में खर्च करने का निर्देश दिया गया है। विद्यालय विकास समिति (V.C) के माध्यम से इस कार्य को पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
Composite Grant क्या है?
“Composite Grant” वह धनराशि है जो विद्यालयों के समग्र विकास के लिए प्रदान की जाती है। इसमें विद्यालय का ढांचा, शिक्षा से जुड़ी सामग्री, सफाई, मरम्मत आदि की सुविधाएं शामिल होती हैं। अब इस अनुदान का उपयोग खासतौर पर पानी, ट्यूब लाइट/बल्ब और बिजली की सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए किया जाने का निर्देश है।
आदेश में दिए गए निर्देश
शिक्षा निदेशक द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:
- जिन विद्यालयों में अब तक पेयजल, ट्यूब लाइट/बल्ब और बिजली (वायरींग सहित) नहीं हैं, वहां जल्द से जल्द इनका प्रबंधन किया जाए।
- यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
- सिर्फ पानी की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि उसे उपयोग के लिए सुलभ बनाना भी आवश्यक है।
- जहां ये सुविधाएं पहले से हैं, वहां उनकी कार्य स्थिति की जांच की जाए कि वे चालू हैं या नहीं।
- जिलावार रिपोर्ट दो दिनों के भीतर विभाग को भेजी जाए, जिसमें सभी बिंदुओं की जानकारी हो।
उम्मीदित लाभ
इस योजना से राज्य के विशाल संख्या में बच्चों को सीधे फायदा पहुंचेगा। आइए, इसके मुख्य लाभों पर नज़र डालते हैं:

- शिक्षण माहौल का सुधार
- बिजली और रोशनी की सुविधाओं से कक्षा में अध्ययन का वातावरण सुधरेगा।
- गर्मी और अंधेरे की समस्याओं से छुटकारा मिलेगा, जिससे छात्र और शिक्षक दोनों ही अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
- स्वच्छ पेयजल की सुविधा
- पानी की सुविधा से बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाया जा सकेगा|
- जिसके कारण स्कूल की उपस्थिति में भी सुधार होगा।
- शिक्षकों की कार्यशैली का सुधार
- जब आधारभूत सुविधाएं बेहतर होती हैं तो शिक्षक अपने कार्य को उत्साह के साथ कर सकते हैं|
- जिससे शिक्षा की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
बिहार के विद्यालयों में पानी की स्थिति
बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता कम है। कुछ विद्यालयों में हैंडपंप या नल की व्यवस्था है, लेकिन रखरखाव के अभाव के कारण ये अक्सर ठीक से काम नहीं करते। इसके अतिरिक्त, जल की गुणवत्ता भी एक गंभीर समस्या है, क्योंकि कई इलाक़ों में भूजल में आर्सेनिक और अन्य हानिकारक तत्व पाए जाते हैं।
हालांकि, सरकार ने “हर घर नल का जल” और “जल जीवन मिशन” जैसी योजनाओं के तहत विद्यालयों में जल आपूर्ति सुधारने के लिए प्रयास किए हैं, फिर भी कार्यान्वयन में कई चुनौतियां हैं, जैसे कि वित्तीय कमी, स्थानीय प्रशासन की अनदेखी, और तकनीकी दक्षता का अभाव।
ट्यूब लाइट और प्रकाश व्यवस्था की स्थिति
सही प्रकाश व्यवस्था एक प्रभावी शिक्षण माहौल के लिए आवश्यक है। बिहार के कई सरकारी विद्यालयों में ट्यूब लाइट या अन्य प्रकाश संसाधनों का अभाव है। कुछ विद्यालयों में जहाँ ट्यूब लाइट उपलब्ध हैं, वहाँ बिजली की अनियमितता के कारण ये अक्सर खराब रहती हैं।
ग्रामीण इलाकों में, जहाँ बिजली की उपलब्धता कम है, स्कूलों में अक्सर अंधेरा होता है, विशेषकर मानसून के समय। इससे छात्रों को पढ़ाई में कठिनाई होती है और उनकी आंखों पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसके अलावा, पुरानी और कमजोर वायरिंग के कारण कई विद्यालयों में ट्यूब लाइट जल्दी खराब हो जाती हैं, और इनके प्रतिस्थापन में समय लगता है।
कार्यान्वयन की चुनौतियां
हालांकि यह निर्णय प्रशंसा का पात्र है, लेकिन इसके सुचारू कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं:
- अनुदान का दुरुपयोग: यह जरूरी है कि ₹50,000 की राशि का उचित प्रयोग सुनिश्चित किया जाए, न कि सिर्फ औपचारिकता के लिए खर्च किया जाए।
- भौगोलिक विषमता: कुछ क्षेत्रों में तकनीकी सुविधाओं की कमी और ठेकेदारों का न होना काम में देरी उत्पन्न कर सकता है।
- वास्तविक रिपोर्टिंग की आवश्यकता: रिपोर्टिंग में पारदर्शिता और वास्तविकता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य की योजनाओं में गलत आंकड़े न भेजे जाएं।
क्या कहता है प्रपत्र?
पत्र के अंत में एक फार्म दिया गया है, जिसमें प्रत्येक जिले को निम्नलिखित जानकारियों को भरकर भेजना है:
- जिले का नाम
- जिले में प्राथमिक स्कूलों की कुल संख्या
- उन स्कूलों की संख्या जिन्होंने ₹50,000 का अनुदान प्राप्त किया है
- उन स्कूलों की संख्या जहां अभी पानी नहीं है
- ऐसे स्कूल जहां ट्यूब लाइट या बल्ब नहीं हैं
- जहां बिजली (वायरींग समेत) नहीं है
- जिन स्कूलों में कार्य आरंभ कर दिया गया है
इससे राज्य सरकार को पूरे राज्य की सटीक स्थिति का पता चलेगा।
सरकार की इस पहल का महत्व
बिहार सरकार की यह नई पहल कई क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम लाएगी। सबसे पहले, यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों के लिए विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हों, जिससे उनके सीखने की प्रक्रिया में सुधार होगा। उचित रोशनी और पंखों की उपलब्धता से बच्चे ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेंगे और शिक्षक सक्षम रूप से पढ़ा पाएंगे।
दूसरा, यह पहल ग्रामीण इलाकों में डिजिटल शिक्षा के विकास को प्रोत्साहित करेगी। बिजली की उपलब्धता के साथ, विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड और कंप्यूटर जैसी तकनीकी साधनों का उपयोग संभव होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी मॉडर्न शिक्षा के फायदों का लाभ मिलेगा और वे शहरों के बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
इसके अलावा, यह योजना शिक्षकों और माता-पिता के बीच विश्वास को मजबूत करेगी। जब माता-पिता देखेंगे कि सरकार विद्यालयों में बेहतर सुविधाओं की पेशकश कर रही है, तो वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए और अधिक उत्साहित होंगे। इससे स्कूल में नामांकन की संख्या बढ़ेगी और ड्रॉपआउट की दर में कमी आएगी।
जिला शिक्षा अधिकारियों की भूमिका
इस योजना के सफल कार्यान्वयन में जिला शिक्षा अधिकारियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें यह यकीन दिलाना होगा कि आवंटित कोष का सही ढंग से प्रयोग हो और सभी विद्यालयों में विद्युत व्यवस्था उपलब्ध हो। इसके लिए उन्हें विद्यालयों का निरीक्षण करना होगा, उन विद्यालयों को पहचानना होगा जहाँ बिजली की कमी है, और वहां तुरंत कार्य आरंभ करना होगा।
इसी के साथ, उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बिजली व्यवस्था दीर्घकालिक हो। इस उद्देश्य के लिए नियमित रखरखाव और सुधार का उपाय होना चाहिए। यदि किसी विद्यालय में बिजली की उपलब्धता होने के बावजूद वह सुचारू नहीं है, तो उसकी त्वरित मरम्मत कराई जानी चाहिए।
समाधान और सुझाव
बिहार के शिक्षण संस्थानों में जल, प्रकाश व्यवस्था और बिजली की स्थिति को सुधारने हेतु निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
- स्वच्छ पेयजल के लिए:
- हर विद्यालय में पानी को शुद्ध करने के लिए सिस्टम लगाना चाहिए।
- हैंडपंपों और नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी के लिए स्थानीय समितियों का गठन करें।
- जल जीवन मिशन के अंतर्गत विद्यालयों को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है।
- प्रकाश व्यवस्था के लिए:
- सौर ऊर्जा पर आधारित ट्यूब लाइट और बल्ब का उपयोग बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
- विद्यालयों में ऊर्जा बचाने वाले एलईडी लाइट्स लगाने का प्रयास करें।
- पुरानी बिजली की तारों की जांच और सुधार के लिए नियमित निगरानी का आयोजन करना चाहिए।
- बिजली आपूर्ति के लिए:
- ग्राम क्षेत्रों में सौर ऊर्जा पैनल लगाए जाने चाहिए।
- बिजली की कटौती को कम करने के लिए स्थानीय बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाएं।
- विद्यालयों में बैकअप पावर सिस्टम जैसे इनवर्टर या जनरेटर की व्यवस्था करनी चाहिए।
भविष्य की दिशा
यह कदम केवल एक शुरुआत है। अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाए, तो आगामी वर्षों में सभी सरकारी स्कूल आदर्श शिक्षण केंद्र बन सकते हैं। भविष्य में सरकार स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय आदि जैसी अन्य सुविधाओं के लिए भी ठोस प्रयास कर सकती है।
शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, यह एक समग्र अनुभव है जो बच्चों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। यदि स्कूलों में पानी, रोशनी और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं होंगी, तो शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्न उठता है।


