e-Shikshakosh क्या है?

यह एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां स्कूलों, शिक्षकों और छात्रों की पूरी जानकारी संग्रहीत होती है। एक ऐसा डेटाबेस जहां हर छात्र का विवरण – नाम, उम्र, पता, शैक्षणिक इतिहास से लेकर स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति तक – सुरक्षित रूप से रखा जाता है। यह पोर्टल बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा संचालित है और इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की ट्रैकिंग करना, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और सरकारी योजनाओं का सही वितरण सुनिश्चित करना है।
पोर्टल की शुरुआत से अब तक लाखों छात्रों की जानकारी अपडेट हो चुकी है, जिससे dropout rates में कमी आई है और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्यों अपडेट करना जरूरी है? बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के पत्र में स्पष्ट निर्देश है कि सभी स्कूलों को छात्र प्रोफाइल को अपडेट करना अनिवार्य है, खासकर नई शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में। यदि अपडेट नहीं हुआ, तो छात्र सरकारी लाभों से वंचित रह सकते हैं, और स्कूल की रिपोर्टिंग में त्रुटियां हो सकती हैं। यह पोर्टल न सिर्फ डेटा संग्रह करता है, बल्कि विश्लेषण भी प्रदान करता है, जिससे शिक्षक छात्रों की कमजोरियों को पहचानकर सुधार कर सकते हैं।
अपडेट क्यों जरूरी? छात्रों का भविष्य दांव पर
कल्पना कीजिए, एक छात्र जो ग्रामीण क्षेत्र से आता है, उसकी प्रोफाइल अपडेट नहीं है। नतीजा? वह छात्रवृत्ति, मिड-डे मील या स्वास्थ्य जांच जैसी योजनाओं से चूक जाता है। e-Shikshakosh अपडेट से छात्रों की प्रगति ट्रैक होती है – कक्षा से कक्षा तक, स्कूल से स्कूल तक। बिहार में जहां शिक्षा दर अभी भी चुनौतीपूर्ण है, यह पोर्टल dropout को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पत्र में उल्लेख है कि 31.03.2024 तक की जानकारी को अपडेट करने का निर्देश था, लेकिन अब 2025-26 सत्र के लिए नई अपडेट्स जरूरी हैं।
शिक्षकों के लिए यह एक अवसर है। अपडेट से आप छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझ सकते हैं – जैसे कोई छात्र विशेष आवश्यकता वाला है या नहीं। इससे शिक्षा व्यक्तिगत化 होती है, जो पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं। साथ ही, यह पोर्टल शिक्षकों की प्रोफाइल भी अपडेट रखता है, जिससे प्रमोशन, ट्रांसफर और प्रशिक्षण आसान होते हैं। यदि आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ एक फॉर्मेलिटी है, तो गलत हैं! यह शिक्षा की डिजिटल नींव है, जो भविष्य में AI-आधारित सुझाव भी दे सकता है।
क्यों जरूरी है साझा प्रयास
“यह काम तो एक-दो शिक्षक कर सकते हैं, सभी को क्यों शामिल होना पड़े?” जवाब सरल है: टीमवर्क से ही परिणाम बड़े होते हैं! e-Shikshakosh पर डेटा अपलोड करना सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्कूल की पूरी तस्वीर को डिजिटल रूप में प्रस्तुत करने का मिशन है। जब सभी शिक्षक मिलकर काम करते हैं, तो:
- सटीकता बढ़ती है: अलग-अलग शिक्षक अलग-अलग कक्षाओं या विषयों के डेटा को बेहतर समझते हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा 1-5 के शिक्षक प्राथमिक छात्रों की जानकारी बेहतर दे सकते हैं, जबकि उच्च कक्षाओं के शिक्षक उनकी प्रगति को सटीक अपडेट कर सकते हैं।
- समय की बचत: जब जिम्मेदारी बंटती है, तो काम तेजी से पूरा होता है। एक शिक्षक पर बोझ नहीं पड़ता, और डेडलाइन (जैसे 2025-26 सत्र के लिए अपडेट) आसानी से पूरी हो जाती है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: सभी शिक्षकों की भागीदारी से डेटा में त्रुटियां कम होती हैं, और स्कूल की प्रगति की सही तस्वीर सामने आती है।
- छात्रों का लाभ: सटीक डेटा से छात्रों को साइकिल योजना, पोशाक, छात्रवृत्ति, और मिड-डे मील जैसी योजनाओं का लाभ समय पर मिलता है।
पत्र में उल्लेख है कि 31.03.2024 तक की जानकारी को अपडेट करने का निर्देश था, लेकिन अब नए सत्र के लिए सभी शिक्षकों को मिलकर डेटा अपलोड करना है। यदि यह काम समय पर नहीं हुआ, तो स्कूल की फंडिंग, योजनाओं का आवंटन, और यहां तक कि शिक्षकों के प्रमोशन पर भी असर पड़ सकता है।
सभी शिक्षकों की भूमिका e-Shikshakosh पर
e-Shikshakosh पर डेटा अपलोड करना अब एक सामूहिक जिम्मेदारी है। हर शिक्षक को अपनी भूमिका निभानी होगी। पत्र में ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर (BPM) और जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि सभी शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हों। आइए, देखें कि आप क्या योगदान दे सकते हैं:
- प्राथमिक शिक्षक: कक्षा 1-5 के छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे नाम, जन्मतिथि, आधार (यदि उपलब्ध), और उपस्थिति रिकॉर्ड अपलोड करें।
- माध्यमिक शिक्षक: कक्षा 6-12 के छात्रों की शैक्षणिक प्रगति, जैसे ग्रेड्स, रोल नंबर, और विषय-विशिष्ट प्रदर्शन, अपडेट करें।
- कंप्यूटर शिक्षक: तकनीकी सहायता प्रदान करें, जैसे बैच अपलोड में मदद करना या अन्य शिक्षकों को पोर्टल का उपयोग सिखाना।
- प्रधानाध्यापक: समन्वय करें, कार्य बांटें, और यह सुनिश्चित करें कि डेटा सटीक और समय पर अपलोड हो।
- सभी शिक्षक: स्कूल के बुनियादी ढांचे (जैसे कक्षाओं की संख्या, शौचालय, लाइब्रेरी) और शिक्षक प्रोफाइल (प्रशिक्षण, अनुभव) को अपडेट करने में योगदान दें।
पिछले अनुभवों से हमने देखा है कि कुछ शिक्षकों को लगता था कि डेटा अपलोड का काम सिर्फ कंप्यूटर शिक्षकों का है। लेकिन अब यह स्पष्ट है: हर शिक्षक का योगदान जरूरी है। यह एक सामूहिक मिशन है, जिसमें आपकी विशेषज्ञता स्कूल की प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
विभागिए पत्र
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: डेटा अपलोड कैसे करें?
e-Shikshakosh पोर्टल पर डेटा अपलोड करना कोई जटिल काम नहीं है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें, और आप देखेंगे कि यह कितना सरल है:

- पोर्टल पर लॉगिन:
- वेबसाइट https://eshikshakosh.bihar.gov.in/ पर जाएं।
- अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग करें। यदि नहीं है, तो प्रधानाध्यापक या BPM से संपर्क करें।
- ‘फॉरगॉट पासवर्ड’ ऑप्शन से OTP के जरिए पासवर्ड रीसेट करें।
- कार्य बांटें:
- स्कूल में मीटिंग करें और तय करें कि कौन सा शिक्षक कौन सा डेटा अपलोड करेगा। उदाहरण: प्राथमिक शिक्षक व्यक्तिगत डेटा, माध्यमिक शिक्षक शैक्षणिक डेटा, और कंप्यूटर शिक्षक तकनीकी सहायता।
- पत्र में 03.06.2024 की बैठक का जिक्र है, जिसमें कार्य बंटवारे पर चर्चा हुई थी। उसी मॉडल को फॉलो करें।
- डेटा तैयार करें:
- छात्र डेटा: नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता, आधार, शैक्षणिक रिकॉर्ड, उपस्थिति, स्वास्थ्य जानकारी (जैसे विकलांगता, यदि हो)।
- स्कूल डेटा: कक्षाओं की संख्या, शिक्षकों की संख्या, लाइब्रेरी, शौचालय, और अन्य सुविधाएं।
- एक्सेल टेम्पलेट: पोर्टल पर उपलब्ध टेम्पलेट डाउनलोड करें और डेटा भरें।
- अपलोड और वेरिफाई:
- डैशबोर्ड में ‘अपलोड डेटा’ सेक्शन चुनें। मैनुअल एंट्री या बैच अपलोड का विकल्प चुनें।
- डेटा चेक करें और सबमिट करें। सिस्टम ऑटोमैटिकली त्रुटियां दिखाएगा, जिन्हें ठीक करें।
- अपलोड के बाद, डेटा वेरिफिकेशन रिपोर्ट डाउनलोड करें और रिकॉर्ड रखें।
लाभ जो आपको प्रेरित करेंगे!
जब सभी शिक्षक मिलकर डेटा अपलोड करते हैं, तो परिणाम शानदार होते हैं:
- छात्रों के लिए: समय पर छात्रवृत्ति, साइकिल, और पोशाक जैसी योजनाएं। ड्रॉपआउट रेट में कमी – उदाहरण के लिए, एक स्कूल में अपडेट के बाद 15% ड्रॉपआउट कम हुआ।
- शिक्षकों के लिए: प्रमोशन पॉइंट्स, प्रशिक्षण के अवसर, और कार्य में पारदर्शिता।
- स्कूल के लिए: बेहतर फंडिंग, संसाधन आवंटन, और डिजिटल एक्सीलेंस अवॉर्ड जैसे सम्मान।
- समाज के लिए: एक डिजिटल शिक्षा प्रणाली, जो भविष्य में AI और एनालिटिक्स से और सशक्त होगी।
चुनौतियां? समाधान हैं!
हम जानते हैं कि चुनौतियां आती हैं – इंटरनेट की कमी, समय की कमी, या तकनीकी ज्ञान। लेकिन समाधान हैं:
- इंटरनेट: School Internet या मोबाइल हॉटस्पॉट का उपयोग करें।
- समय: कार्य बांटने से समय कम लगेगा। सप्ताह में 2 घंटे की मीटिंग से काम पूरा हो सकता है।
- तकनीकी ज्ञान: कंप्यूटर शिक्षकों से सहायता लें, या जिला शिक्षा कार्यालय की ट्रेनिंग में शामिल हों।
- प्रेरणा: याद रखें, आपका यह प्रयास हजारों छात्रों का भविष्य बनाएगा।
